Tuesday, April 14, 2009

क्या आप जानते हैं?


रोम के तानाशाह जूलियस सीज़र ने ईसा पूर्व ४५वें साल में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार १ जनवरी को नए साल का उत्सव मनाया गया।
७ जनवरी भारतीय साहित्य और फ़िल्म की दुनिया में महत्वपूर्ण दिन है क्यों कि इस दिन लेखिका शोभा डे, नाटककार विजय तेंदुलकर, अभिनेता जॉनी लीवर तथा अभिनेत्री रीना राय और बिपाशा बासु का जन्मदिन है।
विश्व में मछलियों की कम से कम २८,५०० प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिन्हें अलग अलग स्थानों पर कोई २,१८,००० भिन्न नामों से जाना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संगठन (आई यू सी एन) के मुताबिक कम से कम ११७३ प्रजातियों पर विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है।
इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व पहली बार 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। 1927 में यह पहली बार 14 जनवरी को मनाया गया था। इससे पहले मकर संक्रांति 13 जनवरी को मनाई जाती थी।
जर्मनी का क्षेत्रफल भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान से थोड़ा अधिक है तथा जनसंख्या तीसरे क्रम के राज्य बिहार के बराबर, पर जर्मनी का सकल घरेलू उत्पाद भारत का तीन गुना है।
एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति को यह नाम होमियोपैथी के जनक जर्मन चिकित्सक सैम्युएल हैनीमैन ने सुझाया था। जिसे बाद में अमेरिकन मेडिकल एसोसियेशन ने अपनाया।
प्रेमचंद ने अपने लेखन का प्रारंभ उर्दू में नवाबराय नाम से किया, पर बाद में अधिक पाठकों तक पहुँचने के लिए वे हिंदी में प्रेमचंद नाम से लिखने लगे।
नीदरलैंड के लोग दुनिया में सबसे ऊँचे होते हैं। यहाँ पुरुषों की औसत ऊँचाई पाँच फ़ुट साढ़े ग्यारह इंच है, लेकिन दक्षिणी नीदरलैंड में यह औसत एक इंच कम है।
यदि आप ध्वनि की गति से तेज़ चलने वाले विमान कांकॉर्ड में लंदन से न्यूयॉर्क के लिए चलें तो वहाँ उस समय से भी दो घंटे पहले पहुँच जाएँगे जब आप चले थे।
सापों की कोई ५९०० प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें से ७२५ के पास विषदंत होते हैं तथा २५० प्रजातियाँ ऐसी हैं जो एक ही दंश में मनुष्यों को मार देने की क्षमता रखती हैं
होली केवल एक पर्व ही नहीं संगीत की एक विधा भी है। लोक संगीत के साथ साथ होली को शास्त्रीय या उप-शास्त्रीय संगीत में ध्रुपद, धमार, ठुमरी या चैती के रूप में भी गाया जाता है।
विश्व के इतिहास में २१ मार्च २००८ एक ऐसा दिन था जब हिंदुओं की होली, ईसाइयों का गुड फ्राइडे, मुसलमानों का ईद-ए-मीलाद, पारसियों का नौरोज़ और यहूदियों का पर्व प्यूरिम एक ही दिन मनाए गए।
चंदबरदाई को हिंदी का पहला कवि और उनकी रचना पृथ्वीराज रासो को हिंदी की पहली रचना होने का गौरव प्राप्त है।
दुनिया में चीनी का वार्षिक उत्पादन १३.४ मीट्रिक टन होता है जब कि नमक का २१ करोड़ टन, यानी चीनी से डेढ़ गुना ज़्यादा।
मधुमक्खी के एक छत्ते में २०,००० से ८०,००० तक मधुमक्खियाँ हो सकती हैं।
नील नदी की लंबाई (६५० कि.मी.) पृथ्वी की त्रिज्या (६४०० कि.मी.) से भी अधिक है। अभी नए अनुसंधानों से पता लगा है कि आमेजन इससे भी ज्यादा लंबी नदी है।
नील नदी की लंबाई पृथ्वी की त्रिज्या से अधिक है। नई खोजों में पता लगा है कि अमेज़ॉन इससे भी ज्यादा लंबी नदी है।
२६ अप्रैल २००८ को जोहानेसबर्ग में खेले गए अफ़्रीकन कनफ़ेडरेशन कप फ़ुटबॉल मैच का सबसे सस्ता टिकट १००,०००,००० ज़िंबाब्वे डॉलर का था।
भारतीय मसालों के लोकप्रिय निर्माता और निर्यातक प्रतिष्ठान एम.डी.एच. का पूरा नाम महाशियाँ दी हट्टी है।
संयुक्त अरब इमारात की जनसंख्या में प्रवासी नागरिकों का प्रतिशत 85 है, जिनमें 40 प्रतिशत लोग भारतीय हैं।
कर्नाटक के हरिहर नगर स्थित हरिहरेश्वर मंदिर की प्रतिमा आधी विष्णु और आधी शिव के रूप में हैं।
सत्रहवीं शती में मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के आक्रमण के बाद वृंदावन में कृष्ण की राधा-रमण नामक केवल यह एक प्रतिमा बची थी।
रायपुर स्थित नगर-घड़ी में हर घंटे बजने वाले गजर के लिए छत्तीसगढ़ की 24 लोक-धुनों को संयोजित किया गया है।
कि सुप्रसिद्ध हिन्दी कथाकार चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने केवल तीन कहानियाँ लिखी हैं।
मधुमक्खी के कान नहीं होते। इसकी कमी को उसके शक्तिशाली एंटिना स्पर्श से पूरा करते है।
कि गौरैया एक ऐसा पक्षी है जो पालतू न होने पर भी मनुष्य के आसपास ही रहना पसंद करता है।
कि राजस्थान में सुंधा माता नामक एक ऐसा पर्वत है जहाँ खंडित मूर्तियों को रखना पवित्र माना जाता है।
बाबर अपने समय की सामान्य रूप से बोली जाने वाली भाषा फ़ारसी में प्रवीण था, पर उसकी मातृभाषा चागताई थी और उसने अपनी आत्मकथा बाबरनामा चागताई में ही लिखी।
याहू डॉट कॉम का नाम पहले "जेरीज गॉइड टू वर्ल्ड वाइड वेब" था अप्रैल १९९४ में इसे बदल कर याहू डॉट कॉम कर दिया गया।
आलू की खेती में विश्व में तीसरा स्थान रखने वाला भारत १६वीं शती से पहले इसके विषय में जानता तक नहीं था।
कि गुड़हल की दो सौ से अधिक प्रजातियाँ होती है और इसका उपयोग केश-तेल से लेकर चाय तक अनेकों वस्तुओं में होता है।
भारत का सबसे बड़ा हीरा ग्रेट मुग़ल जब १६५० में गोल कुंडा की खान से निकला तो इसका वजन ७८७ कैरेट था।
विश्व में पक्षियों की ८६५० प्रजातियाँ हैं जिसमें से १२३० भारत में पाई जाती हैं।
सदा-बहार पौधा बारूद जैसे विस्फोटक को पचाकर उन्हें निर्मल कर देता है।
कुम्हड़े की प्रजाति मैक्सिमा का वजन ३४ किलोग्राम सो भी अधिक होता है।
मुग़ल उद्यान, दिल्ली में अकेले गुलाब की ही २५० से अधिक प्रजातियाँ हैं।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रतिदिन इतना प्रसाद बँटता है कि ५०० रसोइए और ३०० सहयोगी रोज़ काम करते हैं।
मध्य प्रदेश के साँवेर गाँव में स्थित हनुमान जी का मंदिर उलटे हनुमान के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें स्थापित मूर्ति का सिर नीचे और पैर ऊपर हैं।
कालिदास के गीति काव्य ऋतुसंहार के छै सर्गों में उत्तर भारत की छै ऋतुओं का विस्तृत वर्णन किया गया है।
कि टाटा नैनो विश्व की सबसे सस्ती कार है इसका दाम १ लाख भारतीय रुपये है।
कि चंद्रयान चंद्रमा की ओर भेजा जाने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष यान है।
कि वीरावल के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के उद्धारकों में कुमारपाल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
कि २६ नवंबर को मुंबई में आतंक का निशाना बने लियोपोल्ड कैफ़े का प्रारंभ १९८१ में तेल की दूकान के रूप में हुआ था।
कि पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार १९६५ में मलयालम कवि गोविन्द शंकर कुरुप को दिया गया था।
कि बिच्छू की लगभग २००० जातियाँ होती हैं जो न्यूजीलैंड व अंटार्कटिक छोड़कर विश्व के सभी भागो में पाई जाती हैं।
कि घर घर में गाई जाने वाली आरती ओम जय जगदीश हरे के रचयिता पं. श्रद्धाराम शर्मा थे।
सन २००८ के लिए हिन्दी का साहित्य अकादमी पुरस्कार सुप्रसिद्ध लेखक गोविंद मिश्र को प्रदान किया गया है।
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- अमित प्रभाकर के सहयोग से
खालसा पंथ स्थापना की याद में मनाई जाती है बैसाखी
नई दिल्ली। दशम सिख गुरु गोबिन्दसिंह के बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना करने की याद में मनाया जाने वाला बैसाखी पर्व दरअसल एक लोक त्यौहार है जिसमें फसल कटने का उल्लास व्यापक स्तर पर होता है।पंजाब और हरियाणा सहित कई क्षेत्रों में बैसाखी मनाने के आध्यात्मिक सहित तमाम कारण हैं। सिख धर्म के विशेषज्ञों के अनुसार पंथ के प्रथम गुरू बाबा नानक देव ने वैशाख माह की आध्यात्मिक साधना की दृष्टि से काफी प्रशंसा की है। जाडा खत्म होने और गर्मी की शुरूआत के साथ ही लोगों का मन उल्लास से भर जाता है।राजधानी के ऐतिहासिक शीशगंजगुरुद्वारे के वरिष्ठ ज्ञानी हेम सिंह के अनुसार लोकजीवनमें बैसाखी नई फसल आने का त्यौहार है। नई फसल आने के साथ ही ग्रामीण जीवन में सृमद्धिआ जाती है और लोग जाडों के बाद गर्मियों का मौसम शुरू होने की खुशी में इस त्यौहार को पूरे उल्लास के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि बैसाखी के दिन ही दशम गुरु गोबिन्दसिंह ने आनंदपुर साहिब में वर्ष 1699में खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस दिन उन्होंने खालसा पंथ पर जान न्यौछावर करने के लिए अपने अनुयायियों को आगे आने को कहा था। लेकिन जब गुरु के लिए सिर देने की बात आई तो केवल पांच शिष्य ही सामने आए।ज्ञानी हेम सिंह के अनुसार इन्हीं पांचों शिष्यों को पंजप्यारा कहा जाता है। गुरु गोबिन्दसिंह ने इन पंजप्यारों को अमृत छका कर अपना शिष्य बनाया था और खालसा पंथ की स्थापना की थी।ज्ञानी हेम सिंह ने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना के दिन गुरु गोबिन्दसिंह ने पहले अपने शिष्यों को अमृत छकाया और फिर स्वयं उनके हाथों से अमृत छका। इसी लिए कहा गया है.. प्रगट्योमर्द अगमणवरियामअकेला, वाह वाह गुरु गोबिन्दआपैगुरु आपैचेला।उन्होंने कहा कि चूंकि खालसा की स्थापना के दिन गुरु गोबिन्दसिंह ने अपने शिष्यों को अमृत छकाया था, लिहाजा बैसाखी के दिन कुछ लोग उसी घटना की याद में अमृत छकते हैं। वैसे खालसा पंथ में साल के अन्य दिनों भी अमृत छका जाता है कि लेकिन इस मामले में बैसाखी का दिन सबसे विशिष्ट होता है।गुरुद्वारा रकाबगंज में प्रचारक शिवतेजसिंह ने बताया कि सिख धर्म में बैसाखी का आध्यात्मिक महत्व है। जीवन में हमेशा नेकी और बदी की लडाई चलती रहती है। बैसाखी के दिन गुरु गोबिन्दसिंह ने अपने शिष्यों को बुराई से दूर करते हुए नेकी की राह पर चलने की शिक्षा दी थी।उन्होंने कहा कि खालसा पंथ में शामिल होने का आध्यात्मिक अर्थ ही नेकी की राह पर चलते हुए एक नए जीवन की शुरुआत करना है। सिंह ने बताया कि बैसाखी पर्व पर आनंदपुर गुरुद्वारे में विशिष्ट आयोजन किया जाता है। देश के अन्य गुरुद्वारों में इस दिन अखंड पाठ का आयोजन होता है। कडाह प्रसाद वितरित किया जाता है और अमृत छकाया जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि हिन्दू पचांगके अनुसार गुरु गोबिन्दसिंह ने वैशाख माह की षष्ठी तिथि के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी दिन चूंकि मकर संक्रांति भी थी, लिहाजा यह बैसाखी का पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा। उन्होंने कहा कि सूर्य मेष राशि में प्राय: 13या 14अपै्रल को प्रवेश करता है, इसी लिए बैसाखी भी इसी दिन मनाई जाती है।बैसाखी का भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भी विशिष्ट स्थान है। अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के समीप 13अपै्रल 1919में हजारों लोग जलियांवालाबाग में एकत्र हुए थे। लोगों की भीड अंगे्रजी शासन के रालेटएक्ट के विरोध में एकत्र हुई थी।जलियांवालाबाग में जनरल डायर ने निहत्थी भीड पर गोलियां बरसाई जिसमें करीब 1000लोग मारे गए और 2000से अधिक घायल हुए। अंगे्रजी सरकार के इस नृशंस कृत्य का पूरे देश में कडी निंदा की गई और इसने देश के स्वाधीनता आंदोलन को एक नई गति प्रदान कर दी।जलियांवालाबाग की घटना ने बैसाखी पर्व को एक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर दिया। आज भी लोग जहां इस पर्व को पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं वहीं वे जलियावालाबाग कांड में शहीद हुए लोगों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना भी नहीं भूलते।